आज मेरे अंदर का शायर जाग गया
ये देख सुनने वाला साला भाग गया
सुनते थे जो अब तक ध्यान से
बहरे थे वे ससुरे कान से
अपनी कविता अब बताऊ मे किसे
है रचना जो वो जताऊ किसे
थी एक कल्पना भी मेरी
जिसकी उड़ान दिखाऊ किसे
अब तो मुर्दों को सुनाता हु मै
कब्र से उनको जगाता हु मै
जो अब तक न थे डरे किसी से
ऐसे भी भूत भगता हु मैं
क्योंकि आज मेरे अंदर का शायर जाग गया
ये देख सुनने वाला साला भाग गया ...................................
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