हास्य कविता का न तात्पर्य लगाईये
इसका बस पूरा लुफ्त उठाईये
जो लगाने बैठे तात्पर्य तो सर दर्द पाएंगे
घूम कर फिर स्टार्टिंग पॉइंट पर आयेंगे
हस-हस कर फिर पेट का दर्द बढाएंगे
और इलाज के लिए डाक्टर के पास जायेंगे
है कसूर न मेरा इसमें कुछ भी
फिर भी इल्ज़ाम मुझ पर लगायेंगे
अपनी हरकतों से फिर भी बाज़ नहीं आयेंगे
और बैठकर दुबारा तात्पर्य लगायेंगे
हासिल ना होगा कुछ फिर भी जोर लगायेंगे
सर दर्द को अपने और बढायेंगे
अच्छा खासा दवा का बिल बनायेंगे
और इसका गुस्सा हम पर जताएंगे
हुस्ट-पुश्त से मरीज बन जायेंगे
फिर भी कुत्ते की पूछ सीधी नहीं कर पायेंगे ...........................
Comments
Post a Comment