यूँ आईने उनके तरफदार नजर आते है
की आईने में हम दागदार नजर आते है
आईने को खबर कहा इस बात की
क्यू हम यूँ गुनेहगार नजर आते है
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हकीकत ने तो कफ़न ओढ़ लिया कब का
और सच यूँ बेकार नजर आते है
वो झूठ के दामन पर मुस्कुराये तो
हर झूठ सच के हक़दार नजर आते है
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रोशन आसमाँ भी उनके तलबगार नजर आते है
हश्र में तो सब उनके वफादार नजर आते है
अकेला खड़ा रह गया में गवाही में अपनी
और खुदा भी उनके तरफदार नजर आते है .....
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